अनूप सिंह

कांडी: प्रखंड क्षेत्र के हरिहरपुर नाव घाट से बिहार के पंडुका नाव घाट के बीच सोन नदी में बारहो महिना नाव का परिचालन किया जाता है, जिससे दोनों राज्यों के बीच आवागमन सुगम होता है,और दूरी कम होती है। इस घाट के माध्यम से प्रतिदिन ग्रामीणों, व्यापारियों एवं नाते- रिश्तेदारों का आना-जाना बना रहता है। हरिहरपुर नाव घाट का संचालन गढ़वा उपविकास आयुक्त एवं कांडी अंचलाधिकारी के देखरेख में जिला परिषद गढ़वा के अंतर्गत किया जाता है। सत्र 2026-27 के लिए घाट की बंदोबस्ती हेतु उपविकास आयुक्त के निर्देश पर 6 अप्रैल से प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन नाविकों की उदासीनता के कारण डाक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। वहीं पिछले सत्र की बंदोबस्ती की समय-सीमा 12 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है। अब पुनः बंदोबस्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 16 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है।
इसके बावजूद स्थानीय नाविकों द्वारा घाट का संचालन लगातार किया जा रहा है। आरोप है कि घाट से प्राप्त होने वाले राजस्व का आपस में मिलकर बंदरबांट किया जा रहा है, क्योंकि आधिकारिक बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मिली जानकारी के अनुसार इस घाट से प्रतिदिन लगभग 200 यात्री आवागमन करते हैं। प्रति व्यक्ति नाव किराया 50 रुपये एवं दोपहिया वाहन का किराया 70 रुपये लिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि गढ़वा उपविकास आयुक्त ने 9 अप्रैल को पत्र जारी कर कांडी अंचलाधिकारी एवं संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया था कि बंदोबस्ती प्रक्रिया पूर्ण होने तक नाव का परिचालन पूरी तरह बंद रखा जाए। साथ ही सरकारी नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
इस संबंध में कांडी अंचलाधिकारी राकेश कुमार सहाय ने बताया कि उपविकास आयुक्त के निर्देशानुसार संबंधित थाना को स्पष्ट रूप से घाट संचालन पर रोक लगाने के लिए कहा गया है।



