उमेश कुमार
रमना प्रखंड के रोहिला गांव निवासी बीसीए (BCA) डिग्रीधारी विकास पाठक ने पर्यावरण संरक्षण की एक ऐसी मिसाल पेश की है। जो आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है। विकास पाठक ने अपनी 16 एकड़ निजी भूमि पर 20 हजार से अधिक पौधे लगाकर बंजर और खाली जमीन को हरे-भरे जंगल में तब्दील कर दिया है। परिणाम स्वरूप विकास पाठक अपने इलाके में पर्यावरण संरक्षण के ग्रीन हीरो के नाम से जाने जाते हैं।
20 हजार से अधिक इमारती व फलदार पौधे विकास पाठक ने लगाई। इस ड्रीम प्रोजेक्ट में कीमती इमारती लकड़ियों से लेकर फलदार पौधे शामिल हैं। जिसमें महोगनी 14,000 पौधे ,सफेद/रक्त चंदन: 2,000 पौधे,सागवान: 2,000 पौधे ,शीशम: 2,000पौधे इसके अलावा बड़े पैमाने पर आम, अमरूद और अन्य फलदार वृक्ष भी लगाए गए हैं।

अपने इस अनूठे प्रयास के बारे में बताते हुए विकास पाठक ने कहा”कोरोना महामारी के दौरान जब चारों तरफ जन-जीवन अस्त-व्यस्त था और अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत के कारण लोग अपनी जान गंवा रहे थे, तब इस त्रासदी ने मुझे गहराई से झकझोर दिया। उसी समय मेरे मन में विचार आया कि समाज और पर्यावरण के लिए कुछ स्थायी और सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। उसी दिन मैंने पौधे लगाने का संकल्प लिया और आज इसका सुखद परिणाम सामने है।”
पेशे से उच्च शिक्षित (बीसीए उत्तीर्ण) होने के बावजूद विकास पाठक ने प्रकृति और समाज सेवा का यह रास्ता चुना। आज उनके द्वारा रोपे गए पौधे लहलहा रहे हैं, जिससे न केवल स्थानीय पर्यावरण शुद्ध हो रहा है, बल्कि भू-जल स्तर सुधारने में भी मदद मिल रही है। विकास पाठक की यह पहल साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।



