गैस के काला बाजारी खुलेआम कंज्यूमेरो से लूट रहे संचालक पैसा 

उमेश कुमार

रमना- बिशुनपुरा गैस सिलिंडर आज गांव हो या शहर हर घर के लिए रसोई मुख्य साधन, बीना गैस सिलिंडर का घर में रसोई बनना मुश्किल हो जाता है। सभी घरों में लगभग पुरानी चूल्हा लकड़ी कोयला का समाप्त हो चूका है। साथ ही पक्का मकान में लकड़ी कोयला का चूल्हा जलाना मुश्किल है। लकड़ी कोयला के चूल्हा से निकलने वाले अधिक धुआँ से गृहनियों को दामा खासी जैसे बीमारी होने का खतरा भी बना रहता था। उक्त कारणों के चलते एवं जंगल सुरक्षा के लिए गैस टंकी चूल्हा आया। जो आज ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। गैस वितरण एवं रिफील का कार्य निजी कमनी करती है। जो मनमाने तरीके से भोले भाले ग्रामीणों से निर्धारित मूल्य से तो अधिक मूल्य वसूलते ही है। साथ ही साथ तरह तरह के हथकंडे अपना कर उपभोक्ताओं को खूब लुटते है। बिशुनपुरा

मनोज इंडेन गैस एजेंसी ने ग्रामीणों को वितरण के द्वारा इजराइल एमेरिका एवं ईरान युद्ध को लेकर भी उपभोक्ताओं को खूब लुटा जा रहा। इस इंडियन गैस एजेंसी का ग्राहक रमना प्रखंड एवं बिशुनपुरा प्रखंड के है। जिनके द्वारा हर रिफील पर 30-40₹ खुलेआम लिया जाता है। यदी कोई इसका विरोध करता है तो उसे गैस रिफील कराने में खूब परेशान किया जाता है। दो देशों की युद्ध के कारण गैस एजेंसी विदेशी आपदा को अवसर में खूब भुना रहे है। गैस रिफील कराने तो जा रहे है लेकिन उन्हें एजेंसी से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। नाम नहीं छापने के शर्त पर दर्जनों गैस उपभोक्ताओं ने बताया कि मार्च माह में मैंने गैस नहीं उठाया फिर भी इनके द्वारा बताया जा रहा है कि आपको गैस डिलीवरी हो गया है। अब इस माह में नहीं मिलेगा, अगले माह में मिलेगा। एक दो दिन तो ग्रामीणों उपभोक्ता किसी प्रकार काम चला लेते है। लेकिन लोगो को मजदूरी करने जाना बच्चों को विद्यालय जाना बीना गैस के नास्ता खाना समय से नसीब नहीं हो पा रहा है।

एक गैस उपभोक्ता ने बताया कि ज़ब मैं गैस लेने गया तो बताया गया कि आपका गैस डिलीवरी हो गया है जबकि उसने गैस लिया ही नहीं और एजेंसी द्वारा दिया भी नहीं गया तो डिलीवर किसको हो गया हमको बताइये तो एजेंसी वालो ने बोला कि हम नहीं जानते आप जानो। काफी देर गैस कर्मियों से अनुनय विनय के बाद भी नहीं मिला तो थक हार कर बिशुनपुरा थाना गया। अपनी आप बीती सुनाया और लिखित आवेदन दिया, थाना प्रभारी मामला को देख कर बोले कि नंबर दो गैस वाले को फिर बोले कि अगर दो दिन नहीं खाओगे तो क्या मर जाओगे, दो दिन बाद तुमको गैस देगा। एक थका हरा उपभोक्ता बडी आस से गया था कि उसका समस्या का समाधान होगा लेकिन प्रशासनिक लोग द्वारा इस प्रकार के बात से मायूस होकर घर आया। ज़ब रखवाले ही ऐसा बात करें तो ग्रामीणों अपनी समस्या को लेकर किसके पास जायेगा। ऐसे में भ्रष्ट गैस एजेंसि संचालको कि मनमानी बेलगाम होने से कौन रोकेगा। ज़ब रक्षक ही पीड़ित को ही प्रताड़ित करने लगे तो जनता किससे उम्मीद लगाए शासन व्यवस्था का। सहयोग मांगेगा।

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