कांडी: गढ़वा जिले का सुदूरवर्ती कांडी प्रखंड आज के आधुनिक दौर में भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है। प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत खुद किसी गंभीर मरीज जैसी हो गई है। आलम यह है कि लाखों की आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाला यह केंद्र खुद ‘बीमार’ है और बदहाली के आंसू रो रहा है। इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर डूमरसोता पंचायत के सामाजिक कार्यकर्ता शशांक शेखर ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर अस्पताल की सूरत बदलने और इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड करने की पुरजोर मांग की है।स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र में शशांक शेखर ने दर्द बयां किया है कि अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की मौजूदगी न होना ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन गया है। दिन ढलते ही अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसर जाता है। आपातकालीन स्थिति में गरीब मरीजों के पास जिला मुख्यालय जाने या महंगे निजी अस्पतालों में लुटने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। समय पर प्राथमिक उपचार न मिलने के कारण कई बार स्थितियां जानलेवा साबित हो रही हैं।अस्पताल की इमारत अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। जर्जर छत और दीवारों के बीच मरीज इलाज कराने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए कि जिस केंद्र पर स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहां न तो सुलभ शौचालय है और न ही बिजली-पानी की मुकम्मल व्यवस्था। संसाधनों के अभाव में यहां कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी भी बेबस नजर आते हैं। अंधेरे और गंदगी के बीच स्वास्थ्य लाभ लेना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता ने पत्र के माध्यम से सरकार को चेताया है कि जब तक इस PHC को CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में अपग्रेड नहीं किया जाता, तब तक व्यवस्थाएं नहीं सुधरेंगी। उन्होंने मांग रखी है कि: अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की 24 घंटे तैनाती हो।
जर्जर भवन का तत्काल जीर्णोद्धार कर इसे आधुनिक स्वरूप दिया जाए।मरीजों व कर्मियों के लिए शुद्ध पेयजल, शौचालय और निर्बाध बिजली की व्यवस्था हो।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य मंत्री इस संवेदनशील शिकायत पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं या फिर कांडी की जनता इसी तरह बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी किस्मत को कोसती रहेगी।



