लाइफ लाइन कही जानेवाली कोयल नदी के पानी में मुर्गा एवं मछली का सड़ा गला अवशेष फेक कर किया जा रहा पानी को प्रदूषित,स्थानीय लोग परेशान

अनुप सिंह

मझिआंव:- मझिआंव क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोयल नदी इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है।कोयल नदी के पानी टंकी घाट,राधा कृष्ण मंदिर घाट एवं बैल गाड़ी घाट सहित अन्य घाटों के बहते हुए पानी में मुर्गा एवं मछली का सड़ा गला अवशेष पाया गया,जिसके कारण स्थानीय लोगों में आक्रोश है।एक ओर जहां नदी सूखने के कगार पर पहुंच चुकी है, वहीं दूसरी ओर इसमें मुर्गा एवं मछली के अवशेष फेंककर पानी को प्रदूषित किया जा रहा है। इससे न केवल नदी का अस्तित्व खतरे में है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

मझिआंव की लगभग 80 प्रतिशत आबादी और उनके माल-मवेशी इस नदी के पानी पर निर्भर हैं। जलस्रोतों की कमी के कारण लोग नदी के सूख जाने के बाद भी जगह-जगह चूआडी (छोटे गड्ढे) खोदकर पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं। ऐसे में जब नदी के पानी में गंदगी और सड़े हुए अवशेष मिल जाते हैं, तो यह पानी उपयोग के लायक नहीं रह जाता।

नदी से उठने वाली दुर्गंध के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है। बदबू के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और वातावरण भी दूषित हो चुका है। इसके साथ ही, गंदे पानी के उपयोग से विभिन्न प्रकार की बीमारियां फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। जिससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी में कचरा और अवशेष फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही नदी की साफ-सफाई और संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं ताकि यह महत्वपूर्ण जलस्रोत स्वच्छ और उपयोगी बना रहे।

कोयल नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि मझिआंव के लोगों की जिंदगी का आधार है। इसे बचाने के लिए प्रशासन और आम जनता दोनों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।तभी आने वाले समय में इस संकट से राहत मिल सकती है।

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