बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह की पहल रंग लाई, पांच सगे भाइयों के बीच ग्राम सभा में बनी सहमति, गांव की चौपाल बनी विवाद समाधान की मिसाल
अनूप सिंह
गढ़वा:- जब संवाद की पहल होती है, आपसी विश्वास मजबूत होता है और समाज एकजुट होकर रास्ता निकालता है, तो वर्षों से उलझे विवाद भी सुलझ सकते हैं। बरडीहा प्रखंड के बरछा बांध गांव में पांच सगे भाइयों के बीच 12 वर्षों से चले आ रहे 20 एकड़ जमीन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान इसी सोच की मिसाल बनकर सामने आया है। बीडीओ-सह-अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह की पहल से ग्राम सभा में आपसी सहमति बनी और वर्षों से चली आ रही विवाद की स्थिति समाप्त होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
जानकारी के अनुसार, गांव के विलास चौधरी, राम लखन चौधरी, सुरेश चौधरी, श्यामलाल चौधरी और रामनाथ चौधरी के बीच पैतृक जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। क्षेत्र भ्रमण के दौरान बीडीओ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों के साथ बैठक की। पहली बैठक में प्रारंभिक सहमति बनने के बाद अमीन से 20 एकड़ भूमि की मापी कराई गई और संबंधित भाइयों के हिस्सों को अलग-अलग निर्धारित किया गया। इसके बाद ग्रामीणों की मौजूदगी में आयोजित बैठक में समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आपसी सहमति से निकले समाधान ने गांव में भाईचारे और विश्वास की नई उम्मीद जगाई।

‘गांव की चौपाल में है बड़े विवाद सुलझाने की ताकत’
बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि पंच परमेश्वर और ग्राम सभा की यही असली ताकत है। छोटे-छोटे विवादों के लिए वर्षों तक थाना, अंचल और अदालतों के चक्कर लगाने से लोगों का समय और पैसा खर्च होता है। गांव में संवाद और सहमति से समस्याओं का समाधान निकालने की परंपरा को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि 20 एकड़ उपजाऊ जमीन 12 वर्षों तक विवाद के कारण अनुपयोगी पड़ी रहती है, तो इससे परिवार के साथ कृषि उत्पादन को भी नुकसान होता है। किसान और खेती मजबूत होंगे, तभी गांव और देश समृद्ध होंगे। उन्होंने इस पहल को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की अपील की, ताकि दूसरे गांव भी इससे प्रेरणा ले सकें।
बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी पुष्प रंजन ने की। मौके पर उप प्रमुख सत्येंद्र पासवान, राजन चौधरी, सुदामा चौधरी, बसंत चौधरी, अखिलेश चौधरी, लाला सिंह, रजनीकांत सिंह, अविनाश कुमार, विकास, छोटू सहित ग्रामीणों के प्रतिनिधि मौजूद थे। सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय ने साबित किया कि आपसी संवाद, विश्वास और सामूहिक पहल से विवाद की जगह समाधान तथा कटुता की जगह भाईचारा कायम किया जा सकता है।



