बीडीओ सह सीओ की पहल से बरछाबांध में 12 वर्षों के जमीन विवाद के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत; पांच भाई-भतीजों के बीच बनी सहमति

अनूप सिंह 

बरडीहा अंचल क्षेत्र के बरछाबांध में वर्षों से चले आ रहे एक जटिल पारिवारिक, और भूमि विवाद के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पांचों भाइयों के बीच पिछले 12 वर्षों से कुल 20 एकड़ जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा है। और जिस पर 12 वर्षों से खेती भी बंद थी,और थाने से लेकर सिविल कोर्ट तक कई मुकदमे दर्ज थे। वहीं जमीन को लेकर भाइयों ने आपसी लड़ाई में लाखों रुपए खर्च कर दिए साथ ही लाखों के उत्पादन के नुकसान भी हो चुकी है।

वहीं बरडीहा सीओ प्रवीण कुमार सिंह की प्रेरणादायी पहल से सुलझने की राह पर आगे बढ़ा है। बताया गया है कि सकारात्मक पहल और बैठक की शुरुआत करते बीते शनिवार को जब बीडीओ सह सीओ प्रवीण कुमार सिंह अपनी टीम के साथ सुबह के पैदल भ्रमण पर निकले थे, तब ग्रामीणों ने उनसे इस जटिल मामले के समाधान का अनुरोध किया था। उनकी अपील पर बुधवार, 16 सितंबर को समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई। सुबह ठीक 7:00 बजे वह ब्लॉक के जेई अनिल कुमार चौधरी और अंचल अमीन अमलेश यादव के साथ बरछाबांध पहुंचे,और बैठक शुरू की। इस निष्पक्ष पहल से वर्षों से आमने-सामने खड़े सुरेश चौधरी श्याम नाथ चौधरी रामनाथ चौधरी तिनों भाइयों एवं स्वर्गीय विलास चौधरी के पुत्र सालिक चौधरी, पूर्व मुखिया स्वर्गीय राम लखन चौधरी के पुत्र सीताराम चौधरी के बीच आपसी दूरियां कम होने लगीं।

बैठक की शुरुआत में सभी तिनों भाइयों एवं भतिजों ने स्वेच्छा से स्वीकार किया कि जो भी पंच में निर्णय होगा, वे उसे पूर्णतः स्वीकार करेंगे।जिसके बाद बुधवार से ही जमीन की मापी का कार्य शुरू हो गया है। बताया गया कि कुल 20 एकड़ जमीन की मापी और बंटवारे में लगभग 4 से 5 दिन का समय लग सकता है।

 कहा गया कि अंतिम बैठक: कार्य पूरा होने के बाद पुनः बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस विवाद का अंतिम रूप से निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा। अंचल अधिकारी ने यह भी बताया कि बंटवारे के बाद सभी की होल्डिंग अलग कर दी जाएगी और सबकी रसीद अलग-अलग काट दी जाएगी।

यह घटना एक मजबूत संदेश देती है कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने और अनावश्यक खर्च करने से बेहतर है कि आपसी भाईचारे और सकारात्मक सोच के साथ बैठकर पंचायती की जाए। लोग आपस में बैठकर अपनी जमीन का सहजता से बंटवारा कर सकते हैं, जिससे बिना किसी बड़े खर्च के समाधान हो सकता है। साथ ही आपसी सौहार्द भी बढ़ता है। अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह का यह प्रयास समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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