अनूप सिंह
खान एवं खनिज विकास विनियमन संशोधन अधिनियम 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से शनिवार को मझिआंव एवं बरडीहा प्रखंड परिसर में एक दिवसीय धरना दिया गया। धरना के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम छह सूत्री मांगपत्र संबंधित प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी को सौंपा गया। धरना के दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की खनिज नीति को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

छह सूत्री मांगों में अधिनियम की धारा 9डी के राज्यों के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव का गंभीर परीक्षण कराने, खनिज उत्पादक राज्यों के साथ इस विषय पर सार्थक एवं संस्थागत परामर्श सुनिश्चित करने तथा राज्यों के खनिज संसाधनों से जुड़े वित्तीय अधिकारों और विकास आवश्यकताओं के बीच संवैधानिक संतुलन कायम करने की मांग शामिल है। इसके अलावा झारखंड के लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये के लंबित खनन संबंधी आर्थिक दावों के शीघ्र निपटारे के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर पहल करने तथा आदिवासी-मूलवासी समाज, विस्थापित परिवारों और खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को खनिज नीति एवं विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की मांग की गई।

धरना को संबोधित करते हुए प्रभारी मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, जंगल, पहाड़, नदियों और खनिज संपदा से है। आदिवासी एवं मूल समाज के लिए ये संसाधन जीवन, संस्कृति, पहचान और अस्तित्व से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और तिलका मांझी जैसे वीरों के संघर्षों का इतिहास जल, जंगल, जमीन और अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है।
मौके पर मनोज कुमार तिवारी, ज्योतिष धर दुबे, आनंद पांडे, बरडीहा प्रखंड युवा अध्यक्ष युसूफ अंसारी, अनिल कुमार रवि,राजेंद्र पासवान, बसंत राम, रामधनी चौधरी और देवेंद्र राम समेत अन्य नेताओं ने भी विचार व्यक्त किए।



