अनूप सिंह
बरडीहा: प्रखंड के बरछाबांध गांव में 12 वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद का अंत भावुक और ऐतिहासिक दृश्य का गवाह बना। पांच भाइयों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवाद का आपसी सहमति से समाधान होने के बाद शुक्रवार को विवादित जमीन पर हल चला और खेती की शुरुआत हुई। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए, पूजा-अर्चना की और परिवार में लौटी एकता पर खुशी जाहिर की। ग्रामीणों ने इस दिन को 12 वर्षों के वनवास की समाप्ति बताते हुए प्रशासन की पहल की सराहना की।
प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह की पहल पर विवाद का समाधान होने के अगले दिन यह आयोजन किया गया। ग्रामीणों के बीच पहुंचने के लिए बीडीओ ने अपने आवास से करीब 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों के साथ बैठक हुई, जिसके बाद महिला-पुरुष पारंपरिक उत्साह के साथ खेत की ओर रवाना हुए। खेत में तीन जोड़ी बैलों के साथ हल की व्यवस्था की गई थी।

महिलाएं नारियल, थाल, सिंदूर और पूजा सामग्री लेकर खेत पहुंचीं। नारियल फोड़कर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने स्वयं हल चलाकर खेती की शुरुआत की। फिर तीनों हल एक साथ खेत में चलने लगे। इस दौरान महिलाओं के पारंपरिक गीतों से माहौल भावुक हो उठा। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त होने से परिवारों के बीच फिर से मेल-मिलाप का रास्ता खुला है।
जिला परिषद सदस्य अर्चना प्रकाश भी पूरे कार्यक्रम में मौजूद रहीं। उन्होंने इस पहल को सामाजिक सौहार्द और ग्रामीण स्तर पर विवादों के समाधान की प्रेरणादायक मिसाल बताया। मौके पर उप प्रमुख सत्येंद्र पासवान, पंचायत समिति सदस्य रत्नेश कुमार, सुनील चौधरी, राजन चौधरी, सुदामा चौधरी, बसंत चौधरी, विधायक प्रतिनिधि विनोद रजवार, वार्ड सदस्य स्नेही ठाकुर और समाजसेवी पुष्प रंजन सहित करीब 200 से 250 ग्रामीण उपस्थित थे। विवाद से जुड़े पांचों भाई अपने परिवार के सदस्यों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

ग्राम सभा की ताकत पहचानें, आपसी बातचीत से सुलझाएं विवाद : बीडीओ
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि भूमि विवादों में वर्षों तक मुकदमेबाजी करने से किसानों का समय, पैसा और ऊर्जा बर्बाद होती है। आपसी बातचीत, सहमति और ग्राम सभा की भूमिका से कई विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि छोटे-छोटे विवादों को आपसी संवाद से सुलझाने का प्रयास करें और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया अपनाएं।
उन्होंने कहा कि किसान विवादों से मुक्त होकर खेती और विकास पर ध्यान देंगे, तभी गांव समृद्ध और खुशहाल बनेंगे। ऐसे प्रयास ‘जय जवान, जय किसान’ के संकल्प को मजबूत करने के साथ विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी मददगार होंगे। बरछाबांध में खेत पर चला हल अब ग्रामीणों के लिए केवल खेती की शुरुआत नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और नई उम्मीद का प्रतीक बन गया है।



