उमेश कुमार
एसबीआई फाउंडेसन से संपोषित और केजीवीके द्वारा क्रियान्वित ग्राम सेवा परियोजना के अंतर्गत रमना प्रखण्ड के सिलीदाग व गमहरिया पंचायत के 5 ग्रामों में पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन एवं जल–जंगल–जमीन की सुरक्षा को लेकर विभिन्न सकारात्मक एवं जनहितकारी कार्य किए जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है। परियोजना के माध्यम से गांवों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण, तालाब निर्माण , तालाब मरम्मति, कूप (कुआँ) पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, स्वच्छता अभियान तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल रही है, बल्कि ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राम सेवा परियोजना के तहत समुदाय आधारित सहभागिता को विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्रामीणों, महिला समूहों, युवाओं एवं किसानों को पर्यावरणीय मुद्दों पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़कर सामूहिक जिम्मेदारी विकसित की जा रही है।
स्थानीय मुखिया श्रीमती अनीता देवी ने भी परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि जल संरक्षण एवं हरियाली बढ़ने से खेती, पेयजल एवं आजीविका के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
ग्राम सेवा परियोजना के प्रबंधक अशोक प्रदीप मींज ने बताया की परियोजना के माध्यम से विगत एक वर्ष के दौरान अनुपयोगी पड़े 20 कूप का (कुआँ) जीर्णोद्धार, और 8 तालाबो का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है जिसमे में वर्षा जल का संचयन से करीब 2798 क्यूबिक मीटर जल संचयन किया जा सकता, इसके फलस्वरूप आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार देखने को मिलेगा, किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होने से कृषि कार्यों में सुविधा होगी तथा सूखे की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ेगी जिससे किसान रबी और जैद मे भी खेती कर सकेंगे और तालाब में मछली पालन कर ग्रामीण अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे । उन्होंने आगे बताया की ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्धता हेतु एक सोलर आधारित जलमीनार का निर्माण और 6 पुराने जलमीनार मे वाटर फ़िल्टर लगाया गया है जिससे ग्रामीण परिवारों को नियमित एवं स्वच्छ पेय जल उपलब्ध हो रहा है और महिलाओं एवं ग्रामीणों को दूर-दराज से पानी लाने की समस्या खत्म हो गई है। आगे उन्होंने बताया की भविष्य में भी जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि समुदाय को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। आगे उन्होंने बताया की परियोजना के माध्यम स्वाक्षता साथी वाहन का संचालन किया जा रहा है जिससे चयनित सभी 5 ग्रामों से घर-घर कचरा संग्रहण कर उसका निष्पादन किया जा रहा है। इससे स्वच्छ वातावरण, बीमारियों में कमी, पर्यावरण संरक्षण, जन-जागरूकता में वृद्धि, और स्वच्छ भारत मिशन को बढ़ावा मिल रहा है ।

केजीवीके के प्रयासों से 500 गांवों 125000 घरों के करीब 450000 लभुकों के बीच भूमि विकास, जलसंचयन के क्षेत्र मे अनेक तरह के कार्य किया गया है जिसमे 38982 हेक्टर जमीन को उपचारित ,3300 एकड़ जमीन को अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन,1064142 क्यूबिक मीटर जल संचयन, 55 से 65%किसानो को दूसरी फ़सल और 30 से 40% किसान तीसरी फ़सल उत्पादन से जोड़ा गया है वही लगभग 100000 घर को आजीविका वृद्धि पहल से जोड़कर और 15000 घर के परिवार को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत से जोड़कर इसका लाभ दिया गया है।
केजीवीके के प्रतिनिधि ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना तथा सतत विकास के माध्यम से उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। संस्था भविष्य में भी समुदाय-केंद्रित विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।



