अनुप सिंह
कांडी:– प्रखंड क्षेत्र में पिछले दो- दिनों रंसे लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार बारिश के चलते पंडी नदी , बारो नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी खेतों में जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्राम भीलमा, सोनपुरा, बरवाडीह, बलियारी, चोका, चंद्रपुरा घुरूआ, राणाडीह, मोखापी, सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से किसानों द्वारा सैकड़ों एकड़ में लगाई गई फसलें जलमग्न हो गई हैं।
बाढ़ के पानी से खेतों में लगी तिल, अरहर, मक्का और धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष शुरुआत में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण वे पहले से ही सुखाड़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे थे। लेकिन अब अचानक हुई मूसलाधार बारिश और नदी में आई बाढ़ ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

किसानों के अनुसार, बारिश की कमी के कारण फसल बचाना पहले ही चुनौती बना हुआ था। इसके बाद लगातार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ने लगा और देखते ही देखते बाढ़ का पानी खेतों में फैल गया। खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से तिल, अरहर, मक्का और धान की फसलों के सड़ने तथा बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि खेती में बीज, खाद, जुताई और मजदूरी समेत काफी खर्च हो चुका है। अच्छी फसल की उम्मीद में किसान दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश की कमी ने परेशान किया और दूसरी ओर अब अत्यधिक बारिश एवं बाढ़ ने फसल को बर्बाद कर दिया है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है।

बाढ़ से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने प्रशासन से खेतों में हुई क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते फसल क्षति का आकलन नहीं किया गया तो उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त करने में काफी परेशानी हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर फसल एवं मकान क्षति का जायजा लिया जाए तथा किसानों और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।





