क्षेत्र में उपचारों के मौलिक अधिकार पर उठ रहे सवाल
उमेश कुमार
रमना:- संविधान के ह्रदय एवं आत्मा कहे जाने वाला उपचारों का मौलिक अधिकार केवल संविधान में ही रह गया है। इस प्रखंड के लोग आज भी अकुशल चिकित्सकों के भरोसे ही है। जिसका खामियाजा आये दिन इस क्षेत्र के लोग भुगते रहते है एक घटना को लोग अभी भूले भी नही है कि एक और दो वर्षीय बालक कि अकुशल चिकित्सक से ईलाज के क्रम में मौत ने दहसत में डाल दिया है। ग्रामीणों के अनुसार गम्हरिया पंचायत के राजेश कुमार के दो वर्षीय पुत्र अनीश कुमार एक दिन बीमार हुआ जिसका ईलाज गांव के ही एक झोलाछाप चिकित्सक से दो दिनों तक कराया। ईलाज से बच्चा का मर्ज घटने के बजाय और बढ़़ने लगा। स्थिति बिगड़़ते देख झोलाछाप चिकित्सक ने अपना पल्ला झाड लिया। जिसके बाद परिजन बीमार बच्चा को लेकर रमना के अकुशल चिकित्स्कों के पास गया वहां से भी आगे भेज दिया गया गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचने पर वहां से भी रेफर कर दिया गया, बेहतर ईलाज के लिए मेदनीनगर लेकर जाते समय रास्ते में ही बच्चा ने दम तोड़ दिया।

मृत्यु कि खबर सुनते ही परिजनों कि चित्कार से गम्हरिया में सन्नाटा पसर गया। सभी कि जुबां पर इस क्षेत्र में चिकित्सिय व्यवस्था को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे है कि इस प्रखंड में कब कोई बेहतर चिकित्सक आएगा, कब हमलोगो को बेहतर चिकित्सिय सुविधा मिलेगा।
इस सम्बन्ध में पुछे जाने पर थाना प्रभारी आकाश कुमार बताये हुए कहा कि मृतक बच्चा का अंत्यपरीक्षण परिजनों कि सहमति से कराया गया है, लिखित आवेदन अभी तक प्राप्त नही हुआ है, सूचनानुसार अग्रिम करवाई कि जाएगी।





